संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक : ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ने बदली विशम्बरी देवी की जिंदगी
विशम्बरी देवी की यह सफलता कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के सकारात्मक प्रभाव का जीवंत उदाहरण है। यह कहानी अन्य ग्रामीण परिवारों को भी प्रेरित करती है कि वे स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।

मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के निर्देशन एवं ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सतत मार्गदर्शन में जनपद ऊधम सिंह नगर के समस्त विकासखंडों में अल्ट्रा पुअर सपोर्ट, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक उद्यमों (फार्म एवं नॉन-फार्म) के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा उद्यमिता विकास की विभिन्न गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, कमजोर एवं वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें स्वरोजगार, उद्यम स्थापना तथा सतत एवं सम्मानजनक आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। इसके साथ ही सामुदायिक संस्थाओं की क्षमता वृद्धि एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इन्हीं प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण विकासखंड बाजपुर के ग्राम पुंडीपुर की रहने वाली विशम्बरी देवी पत्नी विजयपाल सिंह लंबे समय से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए छोटे स्तर पर मुर्गीपालन का कार्य कर रही थीं। सीमित संसाधनों और कम आय के कारण उनका व्यवसाय बहुत छोटे स्तर तक ही सीमित था। परिवार की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था और आमदनी इतनी नहीं थी कि वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।
विशम्बरी देवी “सरस्वती स्वयं सहायता समूह” से जुड़ी हुई हैं, जिसका गठन वर्ष 2019 में हुआ था। समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। इसी दौरान IFAD – वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के माध्यम से उन्हें अपने उद्यम को विकसित करने का अवसर मिला।
वर्ष 2024-25 में ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत उन्हें “व्यक्तिगत उद्यम पैकेज” के तहत मुर्गीपालन गतिविधि के लिए चयनित किया गया। परियोजना के माध्यम से उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, व्यवसाय विस्तार की जानकारी एवं वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया। इस सहायता ने उनके छोटे स्तर के कार्य को एक संगठित उद्यम में बदलने की दिशा दी।
अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए विशम्बरी देवी ने स्वयं ₹20,000 का निवेश किया। इसके अतिरिक्त उन्हें बैंक से ₹50,000 का ऋण प्राप्त हुआ तथा ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना द्वारा ₹30,000 की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इस सहयोग से उन्होंने अपने मुर्गीपालन व्यवसाय का विस्तार किया और बेहतर तरीके से उत्पादन शुरू किया।
परियोजना से जुड़ने से पहले विशम्बरी देवी लगभग 800 से 1000 चूजों का पालन करती थीं, जिससे उन्हें प्रति लॉट मात्र ₹6,000 से ₹7,000 तक की आय हो पाती थी। सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय में अधिक लाभ नहीं मिल रहा था। लेकिन ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना से प्राप्त सहयोग के बाद उन्होंने अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ाया और अब वे 2000 से 2500 चूजों का पालन कर रही हैं। इससे उनकी प्रति लॉट आय बढ़कर लगभग ₹20,000 से ₹22,000 तक पहुंच गई है।
आज उनके उद्यम से कुल ₹1,75,000 की आय प्राप्त हो चुकी है। कुल खर्च लगभग ₹35,000 रहा, जबकि उन्हें लगभग ₹1,40,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह परिवर्तन केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनके परिवार के जीवन स्तर में भी बड़ा सुधार आया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं एवं भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।
विशम्बरी देवी का कहना है कि ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। पहले जहां उनका व्यवसाय सीमित था, वहीं अब वे एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपने क्षेत्र में पहचान बना रही हैं। उनकी सफलता आसपास की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना द्वारा प्रदान किए गए सहयोग ने यह साबित किया है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
