आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरक सफलता कहानी 

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरक सफलता कहानी

मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के निर्देशन एवं ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सतत मार्गदर्शन में जनपद ऊधम सिंह नगर के समस्त विकासखंडों में अल्ट्रा पुअर सपोर्ट, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक उद्यमों (फार्म एवं नॉन-फार्म) के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा उद्यमिता विकास की विभिन्न गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, कमजोर एवं वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें स्वरोजगार, उद्यम स्थापना तथा सतत एवं सम्मानजनक आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। इसके साथ ही सामुदायिक संस्थाओं की क्षमता वृद्धि एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।


इन्हीं प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण विकासखंड बाजपुर के अंतर्गत ग्राम मुडिया पिस्तौर की रहने वाली गीता बर्गली (पति स्व. हरेन्द्र सिंह) की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त और प्रेरणादायक मिसाल है। एक समय था जब उनका जीवन अत्यंत सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच गुजर रहा था। वे एक साधारण गृहणी के रूप में घर पर ही छोटे स्तर पर सिलाई का कार्य करती थीं, जिससे परिवार की आवश्यकताएँ किसी तरह पूरी हो पाती थीं, जबकि उनके पति मजदूरी कर घर चलाते थे। जीवन अपनी सामान्य गति से चल रहा था, तभी अचानक उनके पति का आकस्मिक निधन हो गया और परिवार पर गहरा संकट आ खड़ा हुआ। एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने से आय का स्रोत पूरी तरह समाप्त हो गया और गीता जी के सामने अपने बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य की चिंता सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी।
ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी सिलाई की कला को ही अपनी ताकत बनाया और आत्मनिर्भर बनने का दृढ़ संकल्प लिया। वे महिला एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई थीं। इसी दौरान आई.एफ.ए.डी. (IFAD) द्वारा वित्तपोषित ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के अंतर्गत ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सर्वेक्षण में उनकी लगन, कौशल और आवश्यकता को पहचानते हुए उन्हें सहयोग के लिए चयनित किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें व्यक्तिगत उद्यम के रूप में बुटीक/सिलाई कार्य हेतु सहयोग प्रदान किया गया। मार्च 2025 में उन्होंने अपने उद्यम की औपचारिक शुरुआत की, जिसमें भूमि ग्राम संगठन एवं उज्जवल स्वायत्त सहकारिता (सी.एल.एफ.), चकरपुर का भी सहयोग रहा।
उद्यम को सशक्त रूप देने के लिए ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत गीता देवी के व्यवसाय के लिए कुल एक लाख रुपये की लागत की व्यवसायिक योजना निर्धारित की गई।, जिसमें गीता जी ने स्वयं 20,000 रुपये का अंशदान किया, 30,000 रुपये परियोजना के माध्यम से सहयोग के रूप में प्राप्त हुए तथा शेष 50,000 रुपये बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराए गए। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने दो आधुनिक सिलाई मशीनें खरीदीं और अपने कार्य को घरेलू स्तर से आगे बढ़ाकर एक छोटे बुटीक के रूप में स्थापित किया।
उद्यम की शुरुआत के बाद से अब तक उन्होंने लगभग 72,000 रुपये की कुल आय अर्जित की है, जिसमें से सभी खर्चों को निकालने के बाद लगभग 47,000 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। वर्तमान में वे प्रतिमाह 7,000 से 8,000 रुपये तक का कार्य कर रही हैं और इसमें से 4,000 से 5,000 रुपये तक की नियमित बचत भी सुनिश्चित कर पा रही हैं। यह आय न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक संबल बनी है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आज गीता बर्गली केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियाँ ही नहीं निभा रहीं, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। वे अपने गाँव की गरीब एवं जरूरतमंद बालिकाओं को निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही हैं। उनका यह प्रयास उन्हें केवल एक उद्यमी ही नहीं, बल्कि एक सच्ची मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित करता है।
गीता जी की यह यात्रा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि किसी व्यक्ति को सही समय पर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिल जाए, तो वह विपरीत परिस्थितियों को भी अवसर में बदल सकता है। उनका संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास यह सिद्ध करता है कि आत्मनिर्भरता की राह कठिन जरूर हो सकती है, लेकिन असंभव नहीं।
गीता बर्गली का संदेश उनके अपने शब्दों में:

“जब जीवन में सब कुछ खत्म होता हुआ लगता है, तभी एक नई शुरुआत की ताकत हमारे भीतर जन्म लेती है। मैंने हार मानने के बजाय अपने हुनर पर भरोसा किया और आज मैं न केवल अपने परिवार को संभाल पा रही हूँ, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हूँ।”

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