आईआईटी रुड़की एवं आईएसएस, इरास्मस विश्वविद्यालय, समावेशी नवाचार के लिए वैश्विक साझेदारी पर हस्ताक्षर करेंगे

आईआईटी रुड़की एवं आईएसएस, इरास्मस विश्वविद्यालय, समावेशी नवाचार के लिए वैश्विक साझेदारी पर हस्ताक्षर करेंगे

 

· सतत विकास के लिए संयुक्त अनुसंधान, छात्र आदान-प्रदान एवं जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने हेतु पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन

· किफायती नवाचार एवं समुदाय-केंद्रित इंजीनियरिंग के माध्यम से साक्ष्य-आधारित समाधानों के सह-निर्माण हेतु सहयोग

· समावेशी विकास के लिए सरकार और नागरिक समाज को शामिल करते हुए, शैक्षणिक जगत से परे नेटवर्क बनाने हेतु साझेदारी

आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड, सितम्बर 30, 2025 –

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) एवं अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक अध्ययन संस्थान (आईएसएस), इरास्मस विश्वविद्यालय रॉटरडैम, नीदरलैंड ने विकास अध्ययन, किफायती नवाचार एवं समावेशी विकास के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों के संयोजन में अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पांच साल के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

 

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. (डॉ.) कमल किशोर पंत एवं आईएसएस के रेक्टर प्रो. रुअर्ड गैंज़वूर्ट ने औपचारिक रूप से इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समारोह में प्रो. (डॉ.) पीटर नोरिंगा ने प्रो. गैंज़वूर्ट का प्रतिनिधित्व किया। प्रतिनिधिमंडल में इंटरनेशनल सेंटर फॉर फ्रुगल इनोवेशन के सह-निदेशक एवं टीयू डेल्फ़्ट के प्रोफ़ेसर प्रो. (डॉ.) सीस वैन बीयर्स भी शामिल थे।

 

आईएसएस के रेक्टर, प्रो. रुआर्ड गेंजवूर्ट ने इस सहयोग के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “आईएसएस में, हमारा मानना ​​है कि शैक्षणिक ज्ञान को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जोड़ा जाना चाहिए। आईआईटी रुड़की के साथ यह साझेदारी सामाजिक विज्ञान के दृष्टिकोण एवं तकनीकी विशेषज्ञता को एक साथ लाकर वैश्विक एवं स्थानीय समुदायों के उन्नत समाधान प्रदान करेगी।”

 

हस्ताक्षर समारोह में आईएसएस का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रोफ़ेसर पीटर नोरिंगा ने कहा, “मितव्ययी नवाचार का अर्थ है कम संसाधनों में अधिक से अधिक कार्य करना। साथ मिलकर काम करके, हम ऐसे अनुसंधान एवं अभ्यास को आगे बढ़ा सकते हैं जो ठोस सामाजिक प्रभाव पैदा करें और जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण करें।”

 

प्रोफ़ेसर सीस वैन बीयर्स ने सहयोग के वैश्विक आयाम पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह साझेदारी सतत नवाचार के लिए प्रतिबद्ध यूरोपीय एवं भारतीय संस्थानों के नेटवर्क को मज़बूत करती है। साथ मिलकर, हम सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए संयुक्त अनुसंधान, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, तथा विषयगत कार्यशालाओं की रूपरेखा तैयार करेंगे।”

 

यह सहयोग अकादमिक जगत से आगे बढ़कर, सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज एवं समुदाय-आधारित संगठनों के साथ मिलकर साक्ष्य-आधारित, व्यावहारिक हस्तक्षेप विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके केन्द्रित क्षेत्रों में सतत विकास, किफायती नवाचार एवं समुदाय-केंद्रित इंजीनियरिंग शामिल हैं।

 

इस अवसर पर बोलते हुए, आईआईटी रुड़की के निदेशक, प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “यह समझौता ज्ञापन प्रौद्योगिकी एवं समाज के बीच सेतु निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आईएसएस के साथ सहयोग करके, हमारा लक्ष्य ऐसे मार्ग तैयार करना है जो टिकाऊ एवं किफायती नवाचार के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाएँ और अंततः समावेशी विकास की दिशा में भारत एवं विश्व की यात्रा में योगदान दें।”

 

यह समझौता ज्ञापन आईआईटी रुड़की की वैश्विक सहभागिता रणनीति में एक उपलब्धि है, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता को सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सतत प्रभाव के साथ एकीकृत करने की इसकी प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है। यह एक समझौते से कहीं अधिक, समाज के लिए उपयोगी ज्ञान को आकार देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सामाजिक विज्ञान को इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी से जोड़कर, यह सहयोग छात्रों, शोधकर्ताओं और समुदायों को वैश्विक चुनौतियों के लिए मिलकर समाधान तैयार करने में सक्षम बनाएगा और साथ ही भारत-नीदरलैंड के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करेगा।

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