ए शमशान तेरा हिसाब भी बड़ा नेक है,तेरे यहां अमीर हो या गरीब,सबका बिस्तर एक है,क्रांतिकारी शालू सैनी

रुड़की।हिंदू,मुस्लिम,सिख ईसाई सभी धर्म के धर्मानुसार विधि-विधान से अंतिम संस्कार की सेवा कर अब तक पांच हजार से ज्यादा मृतकों की बन चुकी वारिस को मुर्दों से प्रेम करने वाली लावारिसों की वारिस क्रांतिकारी शालू सैनी ने सिविल लाइन थाने से लावारिस मृतक की जानकारी प्राप्त हुई।जानकारी प्राप्त होते ही हर रोज की तरह आज फिर लावारिस महिला को अपना नाम देकर विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार 


लावारिस पुण्य आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर पुण्य आत्माओं को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिले,ऐसी ईश्वर से प्रार्थना की,वहीं क्रांतिकारी शालू सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास संसाधनों का अभाव है,उसके बावजूद भी वे कभी होंसला नहीं हारती,साथ ही शालू सैनी ने कहा कि इस सेवा में जो भी दानवीर इच्छा अनुसार सहयोग कर सकता है वो संस्था के गूगल पे या फोन पे पर कर सकता हैं।अपनी कमाई से जो व्यक्ति पुण्य सेवा में लगाता है तो उसे उसका भी फल जरूर मिलता है और एक लावारिस को उसका वारिस व अंत समय में किसी को कफन नसीब हो सकता है,क्योंकि ना कोई साथ लेकर कुछ आता ह और ना कोई कुछ लेकर जाता है।उन्होंने सभी से अपील भी की कि सामाजिक कार्य अकेले नहीं हो सकते,इसलिए वो सभी का सहयोग चाहती है,जिसका इस दुनिया में कोई नहीं है या फिर जो अपनो का अंतिम संस्कार करने में असमर्थ है।उनकी अंतिम बिदाई में सहयोगी बनकर पुण्य कमाएं।

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