गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं AC फटने के मामले? जानिए कारण और बचाव के तरीके

गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं AC फटने के मामले? जानिए कारण और बचाव के तरीके

नई दिल्ली/रुड़की:
उत्तर भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई इलाकों में पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। बढ़ती गर्मी के चलते घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसके साथ ही AC फटने (ब्लास्ट) की घटनाएं भी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।


क्या बढ़ता तापमान है AC ब्लास्ट की वजह?

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान AC पर अतिरिक्त दबाव डालता है। जब AC लगातार लंबे समय तक चलता है, तो उसके कंप्रेसर और अन्य हिस्सों पर ओवरलोड बढ़ जाता है।

इसके अलावा, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण तापमान में लगातार वृद्धि भी ऐसी घटनाओं के जोखिम को बढ़ा रही है।


AC फटने के मुख्य कारण

गर्मी में AC ब्लास्ट होने के पीछे कई तकनीकी और लापरवाही से जुड़े कारण हो सकते हैं:

  • ओवरहीटिंग (लगातार कई घंटों तक चलाना)
  • गैस लीकेज या गलत गैस प्रेशर
  • खराब वायरिंग या शॉर्ट सर्किट
  • समय पर सर्विस और मेंटेनेंस न होना
  • सस्ते या घटिया पार्ट्स का इस्तेमाल

कैसे करें AC का सुरक्षित इस्तेमाल?

ऐसे हादसों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है:

✔️ हर सीजन से पहले AC की सर्विस कराएं
✔️ AC को लगातार 24 घंटे न चलाएं, बीच-बीच में ब्रेक दें
✔️ सही वोल्टेज के लिए स्टेबलाइज़र का उपयोग करें
✔️ अच्छी क्वालिटी के वायर और पार्ट्स ही इस्तेमाल करें
✔️ गैस लीकेज या अजीब आवाज़ को नजरअंदाज न करें


कब सतर्क हो जाएं?

अगर AC से:

  • जलने की गंध आए
  • स्पार्क दिखे
  • तेज आवाज़ या वाइब्रेशन हो

👉 तो तुरंत AC बंद करें और किसी विशेषज्ञ तकनीशियन से जांच कराएं।


आईआईटी बीएचयू के मैकेनिकल विभाग के प्रोफ़ेसर जहर सरकार से बात की थी .

उनका कहना था कि कूलिंग के लिए एम्बिएंस (कंप्रेसर के आस-पास) का तापमान, कन्डेंसर के तापमान से क़रीब 10 डिग्री सेल्सियस कम होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “भारत में आम तौर पर एसी के कंडेंसर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक होता है. जब एम्बिएंस का तापमान कन्डेंसर के तापमान से अधिक हो जाता है तब एसी काम करना बंद कर देता है. इन हालात में एसी के कंडेंसर पर प्रेशर बढ़ जाता है. इस वजह से कन्डेंसर के फटने की संभावना बढ़ जाती हैं.”

और किन वजहों से फट सकता है एसी? विशेषज्ञ बताते हैं कि एसी फटने की एक वजह गैस लीकेज भी हो सकती है
अधिक तापमान के अलावा और भी कुछ वजहें हैं जो एसी से जुड़े हादसों का कारण बन सकती हैं.

गैस लीकेज: जानकार बताते हैं कि कन्डेंसर से गैस लीक होने से भी एसी से जुड़ी दुर्घटना हो सकती है. गैस कम होने से कन्डेंसर पर दबाव ज़्यादा पड़ता है, जिससे वो अधिक गर्म होने लगता है. इससे आग लगने की संभावना बढ़ जाती है.

गंदे कॉइल: एसी की कूलिंग में कन्डेंसर कॉइल अहम भूमिका निभाते हैं. यह हवा से गर्मी को बाहर निकालता है. जब कॉइल गंदगी के चलते जाम हो जाता है तब गैस के सामान्य प्रवाह में दिक्कत होती है, इससे कंडेंसर ज़्यादा गर्म होने लगता है, और आग लगने का ख़तरा बढ़ जाता है.

वोल्टेज का उतार-चढ़ाव: लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से भी कंप्रेसर की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. यह भी हादसे का कारण बन सकता है.

ज़्यादा गर्मी पड़ने पर एसी के कंप्रेसर को छांव में रखें. कंप्रेसर और कन्डेंसर यूनिट के आसपास सही तरीक़े से वेंटिलेशन हो यानी वहां हवा आती हो ताकि यूनिट अधिक गर्म न हो.

– नियमित समय पर एसी की सर्विस कराएं ताकि किसी भी समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके.

– एयर फ़िल्टर और कूलिंग कॉइल्स की सफ़ाई नियमित रूप से करें. इससे कंप्रेसर पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा और यह सही तरीके़ से काम करेगा.

– समय-समय पर कूलिंग फैन की भी जांच करें. अगर इसमें कोई समस्या हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं.

जानकार बताते हैं कि ऐसे एसी जिनके कन्डेंसर तांबे के होते हैं, वो एल्यूमीनियम कन्डेंसर वाले एसी से ज़्यादा महंगे ज़रूर होते हैं लेकिन तांबा बेहतर होता है.

तांबा पानी या हवा में नमी के साथ रिएक्ट नहीं करता, यानी वो ज़्यादा नॉन-कोरोसिव (यानी नमी की वजह से वो ख़राब नहीं होते) होता है जिस कारण अधिक मज़बूत होता है.

अपने ‘लो स्पेसफ़िक हीट प्रॉपर्टी’ की वजह से तांबा जल्दी गर्म नहीं होता और कूलिंग भी तेज़ करता है. भारत पर ग्लोबल वॉर्मिंग का असर साफ़ दिख रहा है. अब लगभग हर साल गर्मी का प्रकोप ज्यादा बढ़ता दिख रहा है.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के 30 करोड़ घरों में से केवल 8 फ़ीसदी घरों में ही एयर कंडीशनर हैं, जिनमें से कुछ घरों में एक से अधिक यूनिट हैं. इसके बावजूद, भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता एयर कंडीशनर बाजार है.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2025 में भारत एयरकंडीशनर्स के एक करोड़ 40 लाख यूनिट्स खरीदी गईं.

पिछले साल वैश्विक स्तर पर बेचे गए 17 करोड़ एयर कंडीशनर यूनिटों में से 9 करोड़ यूनिट चीन ने खरीदे, जबकि भारत ने 1 करोड़ यूनिट खरीदे.

पेरिस स्थित ऊर्जा थिंक टैंक, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) का अनुमान है कि 2050 तक देश में घरेलू एयर कंडीशनर के स्वामित्व में नौ गुना वृद्धि होगी, जो टीवी, रेफ्रिजरेटर और वाशिंग मशीन सहित अन्य सभी घरेलू उपकरणों के स्वामित्व में वृद्धि से कहीं अधिक होगी.

जानकार अक्सर एल्यूमिनियम मेटल वाले एसी की जगह तांबे वाले एसी को तरजीह देते हैं.

गर्मी में AC का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है। सही रखरखाव और सावधानी अपनाकर AC ब्लास्ट जैसे खतरनाक हादसों से बचा जा सकता है।

याद रखें, थोड़ी सी सतर्कता आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है

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