धूप दीप नैवेद्य एवं आरती के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की 67 वीं लीला का भव्य मंचन की शूरुआत, यहां पालिका परिसर में सामुदायिक विकास भवन के विशाल पंडाल में शुक्रवार रात्रि से शुरू की गयी। इस मौके पर नरेंद्रनगर नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार ने विधिवत पूजा अर्चना के साथ श्री राम लीला के नाट्य मंचन की शुरवात की गयी गयी , इस मौके पर उन्होंने कहा की नरेंद्रनगर की समस्त जनता खुद को बहुत सौभग़यशाली मानती है जो पिछले 67 साल से राम लीला का मंचन लगातार प्रतिवर्ष प्रभु के आशीर्वाद के साथ संपन्न होता आया है , उन्होंने कहा की आज के दौर में श्री राम के मर्यादा पाठों का अनुसरण प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए
नन्हीं बालिकाओं द्वारा प्रभु श्री राम की आरती की शानदार प्रस्तुति से लीला का भव्य मंचन प्रारंभ हुआ।
लीला की प्रथम रात्रि को नारद मोह लीला, कैलाश लीला, रावण राज्य लीला, पृथ्वी विचार लीला के साथ ही राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व सीता जन्म के मार्मिक दृश्यों को देख श्रद्धालु भक्तजन बड़े आकर्षित थे।
नारद मोहन लीला के दृश्य में,देव ऋषि नारद अपनी तपस्या के बल पर,जब इंद्र का सिंहासन हिला देते हैं, तो उन्हें अहंकार हो जाता है। भगवान विष्णु अपनी माया से विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचते हैं, और नारद को बंदर का रूप देकर उनका अहंकार चूर कर देते हैं।
इस दृश्य में नारद की भूमिका में द्वारिका प्रसाद जोशी का संवाद बेहदप्रभावशाली था।
कैलाश लीला के दृश्य में रावण अपने अहंकार में कैलाश पर्वत को उठाने लगते हैं, कैलाश पर्वत हिलता है, तो माता पार्वती डर जाती है, भगवान शिव अपनी शक्ति से रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब जाता है, रावण त्राहिमाम त्राहिमाम कर शिवभक्ति करता है।
।उक्त मार्मिक दृश्यों के साथ रावण राज्य लीला, पृथ्वी विचार लीला के दृश्य ने भी सभी श्रोताओं को प्रभावित किया।
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राम जन्म का दृश्य को देख श्रद्धालु दर्शक अभिभूत हो उठे। राम,लक्ष्मण,भरत, शत्रुघ्न व सीता जन्म होते ही , पूरा पंडाल प्रभु राम के जयकारों से गूंज उठा।
इस मौके पर नरपाल भंडारी , शैलेंद्र नौटियाल, पवन ड्यूंडी,भगवान सिंह राणा, उत्तम नेगी ,साकेत बिजल्वाण ,महेश ,मनोज गंगोटी आदि बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे।
