आईआईटी रुड़की में यूबीए ओरिएंटेशन में आत्मनिर्भर गाँवों की ओर डाला गया  प्रकाश 

आईआईटी रुड़की में यूबीए ओरिएंटेशन में आत्मनिर्भर गाँवों की ओर डाला गया  प्रकाश

• विशेषज्ञों ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए टिकाऊ एवं विविध कृषि पद्धतियों पर ज़ोर दिया।
• कार्यशाला उन्नत भारत अभियान के तहत शिक्षाविदों, हितधारकों एवं नीति निर्माताओं के बीच सेतु का कार्य करती है।
• पद्मश्री श्री सेठपाल सिंह एवं आईआईटी रुड़की के निदेशक ने गाँवों को सशक्त बनाने में नवाचार की भूमिका पर ज़ोर दिया।
• समन्वयकों को ग्रामीण समुदायों में परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
• सत्रों में ग्रामीण परिवर्तन के प्रेरक के रूप में पर्यावरण-गाँवों, कृषि-विविधीकरण एवं उद्यमिता पर प्रकाश डाला गया।

 

आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड, भारत – 20 सितंबर 2025: आईआईटी रुड़की स्थित उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के क्षेत्रीय समन्वय संस्थान ने एपीजे अब्दुल कलाम ब्लॉक, आईआईटी रुड़की में उत्तराखंड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यूबीए समन्वयकों के लिए एक अभिविन्यास कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में समन्वयकों, विशेषज्ञों एवं सामुदायिक नेताओं ने नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और उद्यमिता के माध्यम से सतत ग्रामीण विकास पर विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन एवं “देशज ज्ञान में बादल” पुस्तक का विमोचन किया गया। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, आईआईटी रुड़की के आरसीआई-यूबीए के समन्वयक, प्रो. आशीष पांडे ने शिक्षा जगत एवं ग्रामीण समुदायों के बीच सेतु निर्माण में यूबीए के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने उद्घाटन भाषण में, आईआईटी रुड़की के निदेशक, प्रो. कमल किशोर पंत ने ज़ोर देकर कहा, “उन्नत भारत अभियान की भावना ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं सतत प्रथाओं के साथ गाँवों को सशक्त बनाने में निहित है। आईआईटी रुड़की में, हम नवाचार-संचालित पहलों के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो आत्मनिर्भर गाँवों के लिए स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।
पद्मश्री सेठपाल सिंह ने कहा, “सच्चा विकास हमारे गाँवों से शुरू होता है। कृषि में विविधता लाकर एवं पारंपरिक ज्ञान को अपनाकर, हम किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर सकते हैं।”
तकनीकी सत्रों में कृषि विविधीकरण, शहद प्रमाणीकरण एवं खाद्य सुरक्षा, पारंपरिक ज्ञान के साथ मौसम पूर्वानुमान, जैविक खेती, पर्यावरण-ग्राम अवधारणाएँ, आत्मनिर्भर गाँवों के लिए उद्यमिता और कृषि-सलाहकार सेवाएँ सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ वक्ताओं में प्रो. एन.के. नवानी, डॉ. मीना कुमारी, रवि सैनी, डॉ. शुभा द्विवेदी और डॉ. पूजा शामिल थीं।
“प्रो. एन. के. नवानी ने राष्ट्रीय मधु प्रमाणीकरण एवं खाद्य सुरक्षा केंद्र की स्थापना के बारे में जानकारी दी, जो राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की सहायता से स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ‘मधु क्रांति’ पहल के तहत किसानों को सहयोग प्रदान कर रही है, जिसमें मधु उत्पादन एवं प्रसंस्करण हेतु उपकरणों पर सब्सिडी तथा मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।”
सत्रों का समापन करते हुए, प्रो. आशीष पांडे ने स्थानीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करने में यूबीए की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “यह कार्यशाला उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यूबीए समन्वय संस्थानों के पीआई को परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में काम करने में मदद करेगी, जिससे ग्रामीण वास्तविकताओं को संस्थागत विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जा सकेगा।”
इस दिन आईआईटी रुड़की स्थित एग्रोमेट वेधशाला का दौरा भी शामिल था, जिसमें प्रतिभागियों को कृषि आधारित नवाचारों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।
कार्यशाला में उन्नत भारत अभियान के दृष्टिकोण – आत्मनिर्भर, टिकाऊ एवं सशक्त गांवों को बढ़ावा देने – के प्रति आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
कार्यशाला के परिणाम भारत सरकार की ग्रामीण विकास प्राथमिकताओं, जैसे स्वच्छ भारत मिशन, आत्मनिर्भर भारत अभियान, 2028 तक किसानों की आय दोगुनी करना, एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, जो सामुदायिक सहभागिता एवं अनुभवात्मक शिक्षा पर ज़ोर देती है, के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। शैक्षणिक विशेषज्ञता को ज़मीनी हकीकतों से जोड़कर, यह पहल स्थिरता, समावेशिता और ग्रामीण सशक्तिकरण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को सुदृढ़ करती है।

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