रेखा ने न सिर्फ अपना खुद का उद्यम शुरू किया, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनीं।

श्रद्धा CLF की सक्रिय सदस्य हैं, को रीप परियोजना से जोड़कर स्वरोजगार की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ने बदली रेखा की ज़िंदगी: गाय पालन से मिली आत्मनिर्भरता

हरिद्वार जनपद के बहादराबाद विकासखंड की रेखा देवी, पत्नी अशोक कुमार, की जीवन यात्रा आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी है। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के माध्यम से रेखा ने न सिर्फ अपना खुद का उद्यम शुरू किया, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनीं।

मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार  आकांक्षा कोण्डे के मार्गदर्शन में जनपद के सभी विकासखंडों में अल्ट्रा पूअर सपोर्ट, फार्म एवं नॉन फार्म एंटरप्राइजेज और सीबीओ स्तर के उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में रावली महदूद गांव की रेखा, जो शिवाय स्वयं सहायता समूह, मुस्कान ग्राम संगठन और श्रद्धा CLF की सक्रिय सदस्य हैं, को रीप परियोजना से जोड़कर स्वरोजगार की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

परियोजना की फील्ड टीम ने अपनी विज़िट के दौरान रेखा की आयविहीन स्थिति को पहचाना और उनकी गाय पालन में रुचि को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹35,000 का ब्याज-मुक्त ऋण अंशदान के रूप में प्रदान किया गया। रेखा ने अपनी ओर से ₹15,000 का अंशदान जोड़कर कुल ₹50,000 का निवेश किया और एक अच्छी नस्ल की गाय खरीदी।

आज रेखा इस व्यवसाय से हर महीने ₹6,500 तक की आय प्राप्त कर रही हैं। यह परिवर्तन न केवल उनके आर्थिक जीवन को स्थिरता प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके परिवार को भी एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा रहा है।

रेखा की यह कहानी ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना द्वारा ग्रामीण अति-गरीब महिलाओं को सशक्त बनाने और उद्यमशीलता की राह पर अग्रसर करने के सार्थक प्रयासों का उदाहरण है। यह दिखाता है कि सही समय पर मिला सहयोग और मार्गदर्शन किस प्रकार किसी के जीवन की दिशा बदल सकता है।

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